देहरादून। उत्तराखंड में प्रस्तावित 1,320 मेगावाट थर्मल पावर परियोजना को लेकर कांग्रेस और राज्य सरकार आमने-सामने हैं। कांग्रेस ने परियोजना से जुड़ी निविदा प्रक्रिया और शर्तों में बदलाव को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव कर एक निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने का रास्ता तैयार किया गया।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि परियोजना से जुड़े टेंडर दस्तावेज में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर निविदा की मूल शर्तों में इतने बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी और इससे राज्य को भविष्य में कितना आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता है।

सरकार ने आरोपों को बताया निराधार

वहीं, राज्य सरकार ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि बिजली खरीद की पूरी प्रक्रिया नियमों, प्रतिस्पर्धी बोली और नियामकीय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाई गई है। सरकार का कहना है कि किसी एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए निविदा प्रक्रिया तैयार नहीं की गई।

ऊर्जा विभाग के अनुसार, RFQ चरण में पांच कंपनियां योग्य पाई गई थीं। इसके बाद प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर परियोजना से संबंधित बिजली खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है।

25 साल की बिजली खरीद को लेकर भी सवाल

कांग्रेस ने प्रस्तावित 25 वर्ष की बिजली खरीद व्यवस्था को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा है। पार्टी ने संभावित वित्तीय बोझ को लेकर सवाल उठाते हुए कहा है कि इतने लंबे समय के करार का राज्य की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

सरकार का पक्ष है कि 25 वर्षों में होने वाला संभावित भुगतान एकमुश्त राशि नहीं है। वास्तविक भुगतान बिजली की दर, आपूर्ति और अंतिम अनुबंध की शर्तों पर निर्भर करेगा।

टेंडर की शर्तें बनी विवाद का मुख्य मुद्दा

इस पूरे विवाद में सबसे अहम मुद्दा टेंडर की शर्तों में बदलाव, बिजली की कीमत, ट्रांसमिशन लागत और लंबे समय के बिजली खरीद समझौते को लेकर है।

कांग्रेस जहां इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रही है, वहीं सरकार का कहना है कि प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा बनाए रखी गई है और किसी विशेष कंपनी को अनुचित लाभ नहीं दिया गया।

अब इस मामले में टेंडर दस्तावेज, नियामकीय मंजूरियों और अंतिम बोली प्रक्रिया पर नजर रहेगी। इन्हीं दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होगा कि परियोजना की शर्तों में किए गए बदलावों का वास्तविक आर्थिक और तकनीकी प्रभाव क्या है।