देहरादून। उत्तराखंड में लोक संस्कृति और पहाड़ी संगीत को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाले बैंड पांडवाज (PANDAVAAS) ने 38वें राष्ट्रीय खेलों से जुड़े अपने लंबित भुगतान को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हस्तक्षेप की अपील की है। बैंड का दावा है कि राष्ट्रीय खेलों के दौरान किए गए विभिन्न कार्यों का करीब 18 लाख रुपये का भुगतान लंबे समय से लंबित है। इस मामले को लेकर पांडवाज ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात सार्वजनिक की है।

राष्ट्रीय खेलों के लिए बनाया था थीम सॉन्ग

रिपोर्ट के मुताबिक, पांडवाज ने 38वें राष्ट्रीय खेलों के लिए ‘हल्ला धूम धड़क्का’ थीम सॉन्ग तैयार किया था। इसके अलावा बैंड ने राष्ट्रीय खेलों के दौरान अलग-अलग स्थानों पर लाइव प्रस्तुतियां भी दीं। बैंड के अनुसार, इन कार्यों के एवज में करीब 18 लाख रुपये की राशि अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। केवल थीम सॉन्ग की फीस करीब 7 से 8 लाख रुपये बताई गई है।

पांडवाज का दावा—कई स्तरों पर की गई गुहार

पांडवाज का कहना है कि भुगतान को लेकर खेल विभाग और संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया। बैंड के अनुसार, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सहित अन्य माध्यमों से भी शिकायत और गुहार की गई, लेकिन अब तक भुगतान को लेकर स्पष्ट समाधान नहीं मिला है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905 राज्य सरकार की आधिकारिक शिकायत निवारण व्यवस्था है।

‘बजट नहीं है, सहयोग करें’ कहकर काम कराने का दावा

पांडवाज के मुताबिक, काम के दौरान उन्हें बजट की कमी का हवाला देते हुए सहयोग करने के लिए कहा गया था। बैंड का दावा है कि उन्होंने आयोजन को देखते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाई और राष्ट्रीय खेलों के लिए काम किया, लेकिन अब अपने मेहनताने के लिए उन्हें लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय खेलों के दौरान पांडवाज को विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम करने थे। कुछ कार्यक्रम राष्ट्रीय शोक के कारण आयोजित नहीं हो सके, जबकि हल्द्वानी, अल्मोड़ा, सोमेश्वर, गोपेश्वर, उत्तरकाशी और पौड़ी सहित कई स्थानों पर कार्यक्रम किए जाने की जानकारी सामने आई है।

लोक संस्कृति के सम्मान पर उठे सवाल

उत्तराखंड में बड़े मंचों पर लोक संस्कृति और लोक कलाकारों को बढ़ावा देने की बात लगातार होती रही है। ऐसे में पांडवाज के भुगतान का मामला कलाकारों के मेहनताने और सरकारी आयोजनों में भुगतान प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े करता है।

पांडवाज की ओर से मुख्यमंत्री से लंबित भुगतान दिलाने की अपील की गई है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस दावे पर क्या स्पष्टीकरण देता है और करीब 18 लाख रुपये के कथित लंबित भुगतान को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है।

नोट: 18 लाख रुपये के भुगतान और उससे जुड़े अन्य दावे पांडवाज की ओर से बताए गए हैं; संबंधित विभाग का पक्ष उपलब्ध रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। इसलिए भुगतान की वास्तविक स्थिति पर आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।